Sunday, July 22, 2012

शिविर का आखिरी दिन बेंगलुरू दर्शन के नाम

बेंगलुरू का श्री राधाकृष्ण मंदिर ।
मैजिस्टिक में मस्ती की दोपहर  - आध्यात्मिक युवा शिविर का आखिरी दिन। शिविर के समापन के बाद हमारे पास पूरा एक दिन का खाली समय था। हमारी वापसी की ट्रेन देर रात को थी। तो हम सबने आज बेंगलुरू शहर घूमने का तय किया। यूं तो दस दिन के दौरान अलग अलग स्थलों पर कार्यक्रम के दौरान बेंगलुरू शहर के कई इलाके हमलोग देख ही चुके थे।

तो इस भ्रमण में हम पटना और वाराणसी के कुछ साथ मिलकर चल पड़े। बड़े भाई सुनील सेवक की अगुवाई में। सबसे पहले हमलोग पहुंचे मैजेस्टिक। यह बस स्टैंड के पास का बाजार है। बेंगलुरु शहर का दिल धड़कता है मैजेस्टिक में। सिटी रेलवे स्टेशन के पास मैजेस्टिक वहां का चाकचिक्य वाला बाजार है। हम यहां घूमते रहे पर कोई शॉपिंग नहीं की। थोड़ी देर बाजार में घूमने के बाद तय किया गया कि ह्वाईट फील्ड साईं बाबा के आश्रम चलते हैं।

सत साईं बाबा के आश्रम की ओर  - तो सुनील सेवक भाई अगुवाई में हमलोग चल पडे साई बाबा के आश्रम की ओर। मैजेस्टिक से हमलोग लोगों से रास्ता पूछते हुए बसें बदलते हुए ह्वाईट फील्ड की तरफ चल पड़े। हमें कोई सीधी बस नहीं मिली। तो ये यात्रा हमें कई टुकड़ों में करनी पड़ी। कुछ देर में हमलोग शहर के बाहर थे। अब पैदल सफर कर रहे थे हम। आसपास में हरे भरे खेत थे। एक जगह एक ठेले पर अमरूद बेचने वाले से हमने कुछ अमरूद लेकर खाए। पर भाषा की समस्या आ गई। हमें कन्नड़ नहीं आती थी और अमरुद वाला हिंदी नहीं जानता था। खैर किसी तरह उसे पैसे देकर हमलोग आगे बढ़े। 

यहां से अगली बस से ह्वाईट फील्ड पहुंचे। यहां एक छोटा सा रेलवे स्टेशन भी है। आश्रम में जाने पर पता चला कि साईं बाबा थोड़ी देर में बाहर से आने वाले हैं। बाकी श्रद्धालुओं की तरह हमलोग बैठ गए इंतजार में। 
बाबा के दर्शन का इंतजार करने वालों में एक मुजफ्फरपुर के व्यापारी भी थे। कहने लगे उनके दर्शन मात्र से कई बिगड़े काम बन जाते हैं। तो हम भी बैठकर इंतजार करने लगे। 
थोड़ी देर में साईं बाबा एक बड़ी सी मोटरकार में आए और संयोग से हमें भी उनके दर्शन हुए। वहां देश भर के कई राज्यों के श्रद्धालु उनके दर्शन के इंतजार कर रहे थे। उनके दो आश्रम है एक सत साईं निलयम पुट्टवर्ती में और दूसरा ह्वाईट फील्ड बेंगलुरू में। जब बाबा आए उनके गाड़ी में बैठे हुए श्रद्धालुओं को दर्शन हुए। लोग अपने निहाल समझने लगे। हम भी उस भीड़ में शामिल थे। 
( 24 अप्रैल 2011 को सत साईं बाबा का निधन हो गया, उन्होंने दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक सामाजिक कार्य किए थे।)  



अब बेंगलुरु से घर वापसी -  साईं बाबा के आश्रम के बाद वापसी में जब हम रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो वहां हमारे हाजीपुर के साथी मिल गए। वे थोड़े परेशान थे। क्योंकि उन्हें वापसी का आरक्षण नहीं मिल पा रहा था। शिविर के दौरान ही रेलवे का विशेष काउंटर कैंप साइट में ही लगा था, जहां हमने आरक्षण करा लिया था जो रेल मंत्री की अनुकंपा से कन्फर्म भी हो गया था। साथ ही हमसे कोई रिजर्वेशन चार्ज में रास्ते में नहीं लिया गया। पर पंकज भाई और उनके साथियों ने इस सुविधा का लाभ नहीं उठाया था।

रात होने पर भूख लगी तो रेलवे स्टेशन के पास खाने के लिए होटल ढूंढने निकले। ज्यादातर होटल हमें हमारी जेब की तुलना में मंहगे प्रतीत हुए। अभी तक हमलोग कैंप में खाना खा रहे थे जहां कोई शुल्क नहीं लग रहा था। अंत में एक बेसमेंट में स्थित रेस्टोरेंट में सांबर चावल खाकर भूख मिटाई। यह सात रुपये की एक प्लेट थी। रात की ट्रेन से हमलोग वाराणसी और पटना के साथियों के संग चेन्नई के लिए रवाना हो गए।   
-    विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
( BANGLURU, SPIRITUAL YOUTH CAMP , NYP, 1992, PALACE GROUNDS )



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