Monday, July 9, 2012

शिमला - थोड़ी सी तू लिफ्ट करा दे

वैसे तो महानगरों में लोग लिफ्ट में चलने के आदि होते हैं। बहुत सी बहुमंजिली इमारतों में लिफ्ट लगी रहती है। लेकिन शिमला में लगी लिफ्ट का प्रयोग सैलानी भी करते हैं और स्थानीय लोग भी। सबसे नीचे वाली सड़क कार्ट रोड, जिस पर बसें चलती हैं, वह शिमला की मुख्य सड़क है।  वहां होटल क्रिस्टल पैलेस  के पास लगी लिफ्ट आपको सीधे कार्ट रोड से लेजाकर लोअर और मिडल बाजार से ऊपर ले जाकर मॉल रोड के लेवेल की ऊंचाई पर पहुंचा देती है। देखा जाए तो इस लिफ्ट से तकरीबन एक से दो किलोमीटर के सफर की बचत हो जाती है। लिहाजा लिफ्ट को आठ रुपये किराया देना महंगा नहीं लगता। लिफ्ट में चलते हुए हमें अदनान सामी का गाना याद आता है - थोड़ी सी तू लिफ्ट करा दे....


हिमाचल पर्यटन विभाग की ओर से संचालित इस लिफ्ट का इस्तेमाल करने के लिए लोगों की लाइन लगी रहती है। हालांकि दो लिफ्ट लगी हैं लेकिन एक साथ सात लोगों से ज्यादा की जगह नहीं होने के कारण लिफ्ट में भीड़ रहती है। लिफ्ट दो हिस्सों में बंटी है। लिफ्ट से नीचे जाना हो या उपर आपको इंतजार करना पड़ सकता है। शिमला की ये लिफ्ट सुबह 8 बजे से रात्रि नौ बजे तक संचालन में रहती है। ये लिफ्ट शिमला की लाइफलाइन है।
शिमला की इस लोकप्रिय लिफ्ट का हर रोज चार से छह हजार लोग इस्तेमाल करते हैं। टूरिस्ट सीजन के दौरान यह आंकड़ा कई बार बढ़ भी जाता है। लिफ्ट के लिए प्रति व्यक्ति दस रुपये किराया वसूला जाता है। वहीं सीनियर सिटीजन को किराये में कुछ रियायत भी दी जाती है।




 वैसे पूरा शिमला शहर ही ऊपर और नीचे का सफर है। यहां लोग एक दूसरे के घर को भी इसी तरह या रखते हैं कि वर्मा जी हमारे ऊपर रहते हैं तो शर्मा जी हमारे नीचे रहते हैं। हमेशा ऊपर नीचे चढ़ना उतरना शिमला के लोगों की सेहत का राज भी है। यहां आपको शायद ही कोई पुरूष या महिला दिखाई दे जिसका वजन समान्य से ज्यादा हो या जिसकी तोंद निकली हुई हो।

शेयरिंग टैक्सी की सेवा भी - अब शिमला में 10 रुपये प्रति सवारी वाली टैक्सी सेवाएं कुछ खास प्वाइटंस के लिए शुरू की गई हैं जिसमें बुजुर्गों और महिलाओं को प्राथमिकता से सफर कराया जाता है। एक बात और शिमला के स्थानीय बसों में अभी भी न्यूनतम किराया दो रुपये का भी है। हालांकि दिल्ली की स्थानीय बसों में कई साल पहले दो रुपये का टिकट खत्म हो चुका है। लेकिन शिमला में राहत है। हम खुद को समाजवादी व्यवस्था वाला देश होने का दावा करते हैं तो हमें स्थानीय बसों में किराया कम रखना ही चाहिए।

साल 2012 की शिमला यात्रा के दौरान हमें पता चला कि वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह जी इन दिनों अमर उजाला शिमला संस्करण के संपादक हैं। तो मैंने उन्हें फोन किया और मिलने का समय मांगा। फिर मैं माधवी और अनादि सभी अमर उजाला शिमला के दफ्तर जा पहुंचे। राजेंद्र सिंह जी के साथ अमर उजाला के पंजाब संस्करण में काम करने का मौका मिला था। साल 1999 से 2001 के दौरान। तब वे लुधियाना और अमृतसर में रहे थे। 

लिफ्ट से नीचे उतरने के बाद लोकल बस से चलकर हमलोग अमर उजाला के दफ्तर पहुंचे थे। इस बार लक्कड़ बाजार के होटल सत्कार में हमारा प्रवास भी अच्छा रहा। होटल शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हास्पीटल के पास है। यह मॉल और रिज से निकट भी है। होटल के आसपास खाने पीने की दुकाने भी हैं। ये होटल हमें यूथ हॉस्टल के सदस्य के तौर पर बुक किया है।  

 - विद्युत प्रकाश मौर्य  -vidyutp@gmail.com

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