Saturday, July 14, 2012

टिहरी की ओर : घुमावदार पहाड़ी रास्ते और लौंग ( 02)

ऋषिकेश के पास गंगा नदीं। 

ऋषिकेश के शिवानंद आश्रम में एक रात रुकने के बाद अगले दिन दोपहर में आगे का सफर की तैयारी शुरू हुई। पहाड़ पर चढ़ाई शुरू होने वाली है। हमलोग टिहरी की ओर जाने वाले हैं। गंगा तट पर सुंदर समय गुजारने के बाद भागीरथी नदी की ओर।

देश भर से आए स्वंयसेवकों की अलग अलग चार टीम तैयार की गई। हर टीम में अलग अलग राज्य से आए लोग हैं। ये टीम अलग अलग बसों से जाएंगी। इनमें से एक बस में हमलोग भी हैं। आश्रम में दोपहर के भोजन के बाद हमारा प्रस्थान हुआ। हमारी बस छह घंटे का घुमावदार पहाड़ी सफर करते हुए टिहरी पहुंची।

हमलोग जिस बस में थे वह ऋषिकेश के बाद नरेंद्र नगर, अगरखालमोहनचट्टी, चंबा, होते हुए बस टिहरी शहर पहुंची तो सूरज ढल चुका था। हमलोग 70 किलोमीटर से ज्यादा पहाड़ी रास्ते का सफर करके आ चुके हैं। टिहरी शहर की समुद्रतल से ऊंचाई 1750 मीटर है। जबकि ऋषिकेश की ऊंचाई 372 मीटर है। तो ठंड का आलम यहां खूब महसूस किया जा सकता है। 

पहाड़ों की यात्रा शुरू करने से पहले शिवानंद आश्रम में एक गुरुजी ने सलाह दी थी कि आप लोग लौंग अपने साथ रखें जब बस की यात्रा में घाटी में चक्कर आने लगे तो लौंग चबाएं इससे राहत मिलेगी। हमने उनकी सलाह पर ऋषिकेश के बाजार से लौंग खरीद लिया था यह रास्ते में बहुत काम आया।


टिहरी बांध के खिलाफ आंदोलन

हमारी बस के प्रभारी मुजफ्फरपुर के डाक्टर एके अरुण थे। बस टिहरी शहर पहुंची तो हमारी मुलाकात दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता सत्य प्रकाश भारत जी से हुई। उन्होंने बताया कि रात को आगे के सफर पर नहीं जा सकते। हमारा रात्रि विश्राम यहीं होगा। जब हम टिहरी पहुंचे तो देखा कि वहां पर टिहरी बांध के खिलाफ प्रख्यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा जी के अगुवाई में अनवरत आंदोलन चल रहा था। फिलहाल बहुगुणा जी यहां नहीं हैं।
विमला बहुगुणा जी के साथ रात्रि भोजन और बातचीत।

सुंदरलाल बहुगुणा की अगुवाई में भवानी भाई शाम को भी धरने पर बैठे थे। यहीं पर हमारी मुलाकात विमला बहुगुणा से हुई वे सुंदरलाल बहुगुणा की पत्नी हैं। रात को खाने में हमे यहां सिर्फ खिचड़ी मिली वह भी हरे पत्ते के दोने में। खाने से पहले शाम को हमलोगों को टिहरी शहर में एक छोटी सी सद्भावना रैली निकाली। हालांकि टिहरी बांध बन जाने  बाद अब वह शहर नहीं रहा। 

हमारी अगली सुबह टिहरी में हुई। यह काफी सर्द है। हमें लग रहा है कि आगे और सरदी बढ़ने वाली है। हल्के नाश्ते के बाद अब आगे चलने की तैयारी है। मतलब और ऊंचाई पर।

टिहरी में देश भर से आए 200 स्वंयसेवक दो हिस्सों में बांट दिए गए। टिहरी में रात्रि विश्राम के बाद अगली सुबह सौ लोगों का जत्था उत्तरकाशी की ओर गया और 100 लोगों टिहरी जिले में बूढ़ा केदार की ओर। हमलोगों की बस टिहरी जिले में बूढ़ा केदार की ओर चल पड़ी है। जबकि बाकी साथी उत्तर काशी जिले के सिलियारा गांव की ओर प्रस्थान कर गए।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com

( HARIDWAR, RISHIKESH, TEHRI, UTTRAKHAND, NYP, EARTHQUAKE RELIEF CAMP 1991 )

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