Tuesday, July 10, 2012

शिमला के इंडियन कॉफी हाउस में चुस्की और वापसी


अगर आप शिमला जाएं तो इंडियन कॉफी हाउस में बैठकर कॉफी की चुस्की का मजा जरुर लें। यह एक यादगार अनुभव होगा। यह हिल स्टेशन शिमला में खाने पीने की सबसे किफायती जगह है। मैंने जितनी बार शिमला की यात्रा की है हर बार इंडियन काफी हाउस में बैठना और कुछ खाना पीना प्रिय टाइम पास रहा है। यहां बैठने पर कुछ शाही फिलिंग भी आती है।

वैसे आप यहां कॉफी के अलावा कई तरह के मसाला डोसा इडली या दूसरे दक्षिण भारतीय व्यंजनों का भी स्वाद ले सकते हैं। मॉल से कुछ कदम पर इंडियन काफी हाउस सिर्फ सैलानियों का ही नहीं बल्कि शिमला के स्थानीय लोगों की भी पसंदीदा जगह है।

खाने-पीने की सबसे सस्ती जगह-  खाने पीने के लिए शिमला में इससे सस्ती और साफ सुथरी जगह कोई और नहीं है। यहां आज भी 15 रुपये की काफी और 33 रुपये का मसाला डोसा और 30 रुपये में दो इडली मिल जाती है। सबसे बड़ी बात की काफी हाउस के वर्दी धारी वेटर किसी फाइव स्टार होटल के रेस्टोरेंट में खाने पीने का लुक देते हैं। इसलिए आप जब इंडियन काफी हाउस में बैठते हैं तो आपको थोड़ी शाही अंदाज का एहसास होता है।

इस काफी हाउस का प्रबंधन अब भी दिल्ली की इंडियन काफी हाउस सोसाइटी की ओर से होता है। हालांकि दिल्ली के मोहन सिंह पैलेस के कॉफी हाउस में अब पहले जैसी रौनक बिल्कुल नहीं दिखाई देती। कई बार इसके बंद होने की भी खबरें आती हैं, लेकिन शिमला के कॉफी हाउस में दिन भर रहने वाली भीड़भाड़ को देखकर लगता है कि यह जरूर फायदे में चल रहा होगा। अगर आप दक्षिण भारतीय खाने के दीवाने हैं तो काफी हाउस में जरूर जाएं। यहां एक तस्वीर लगी है भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की कॉफी पीते हुए।
हो सकता कभी नेहरू जी शिमला आए हों तो यहां पर कॉफी भी पी हो। पर आजकल यहां आपको हनीमून कपल और बुजुर्ग भी साथ-साथ कॉफी हाउस में बैठे मिल जाएंगें।
खुलने का समय - शिमला का इंडियन कॉफी हाउस सुबह आठ बजे से रात के 10 बजे तक खुला रहता है। 
अब तक की अपनी पांच शिमला यात्रा में हर बार इंडियन कॉफी होम हमारा सबसे लोकप्रिय पड़ाव होता है। मैं नहीं हमारे जालंधर के दोस्त प्रोफेसर कुणाल मेहता को भी इंडियन कॉफी हाउस कॉफी में बैठना पसंद है। सबसे बड़ी सुविधा है कि यहां पैकिंग की सेवाएं उपलब्ध है। यानी आप रास्ते के लिए भी मसाला डोसा पैक करा सकते हैं।
साल 2012 की शिमला से लौटते हुए रेल में खाने के लिए हमने यहीं से डोसा और इडली आदि पैक करा लिया था। क्योंकि अपने पिछले यात्रा के अनुभव से हमें पता था कि रास्ते में सोलन रेलवे स्टेशन के अलावा कहीं खाने-पीने को नहीं मिल पाता है। 

IN SHIMLA, INDIAN COFFEE HOUSE, JUN 2012 


-  तो अब चलें टॉय ट्रेन का समय हो गया है। वापसी में हमारा आरक्षण भी नहीं है। जाकर बैठने की सीट का जुगाड़ भी करना है। हमारी वापसी शाम के 5 बजे वाले टॉय ट्रेन से है। पर ये संयोग रहा कि हमें सीट मिल गई है। कालका रेलवे स्टेशन पर उतरे तो रात के 11 बजे थे। स्टेशन से चलकर मुख्य सड़क कालका शिमला हाईवे पर आए। यहां से चंडीगढ़ के मोहाली के करीब वाले बस स्टैंड तक जाने वाली बस मिल गई। देर रात गए हमारे मित्र सुधीर राघव हमें लेने बस स्टैंड आ गए थे। 


अगले दिन सुबह सुबह दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस में हमारा आरक्षण था। ये ट्रेन हमें मोहाली से ही मिल गई। रात में कम सोना हो सका था, इसलिए माधवी और वंश तो चेयरकार पर ही दोबारा सो गए। उना हिमाचल प्रदेश से आने वाली 12058 जन शताब्दी एक्सप्रेस दो मिनट के लिए एसएएस नगर मोहाली में रुकती है। ट्रेन ने दोपहर बारह बजे हमें दिल्ली पहुंचा दिया। 
 -  विद्युत प्रकाश मौर्य  vidyutp@gmail.com
( SHIMLA, INDIAN COFFEE HOUSE, MASALA DOSA, THE MALL, CHANDIGARH, JAN SHATABDI EXP ) 

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