Sunday, July 12, 2020

नत्था टॉप - 8900 फीट की ऊंचाई पर चाय की चुस्की


पटनी टॉप के पार्कों की सैर के बाद अब हमारी अगली मंजिल है नत्था टॉप। मुझसे पहले पटनी टॉप घूमने आए हमारे साथी प्रमोद तिवारी ने सलाह दी थी कि आप नत्था टॉप और सनासर लेक जरूर जाइएगा। तो हमलोग अब नत्था टॉप की ओर चल पड़े हैं। नत्था टॉप की दूरी पटनी टॉप से कोई 12 किलोमीटर है। यह पटनी टॉप से भी ज्यादा ऊंचाई पर है।

आमतौर पर टैक्सी वाले नत्था टॉप और सनासर लेक जाने के लिए अलग से चार्ज करते हैं। यह ठीक है। पर वे रास्ता को खराब बताते हैं। पर हमने देखा ये रास्ता कोई इतना खराब नहीं है।

नत्था टॉप 2711 मीटर ( 8900 फीट ) की ऊंचाई पर है। यानी पटनी टॉप से की 700 मीटर ऊंचा। हमारी टैक्सी घुमाव दार रास्तों से धीरे धीरे नत्था टॉप के लिए ऊंचाई नाप रही है। दूर दूर तक हरे भरे नजारे नजर आ रहे हैं। पर सर्दियों के दिन में पूरी तरह हिमाच्छादित हो जाते हैं। आसपास जो दूर दूर तक पहाड़ियां दिखाई देती हैं ये पीर पंजाल रेंज की पहाड़ियां हैं।  

सर्दियों में होती है बर्फबारी - सर्दियों में नत्था टॉप के एरिया में पारा ग्लाइडिंग का आयोजन भी होता है। इस दौरान यहां खूब रौनक रहती है। सड़क के किनारे खाने पीने की अस्थायी दुकानें सजी रहती हैं। जो इन दिनों नहीं दिखाई दे रही हैं। सर्दियों में नत्था टॉप तक आने वाले लोगों को स्नो जैकेट और गम बूट किराये पर लेना पड़ता है।

व्यू प्वाइंट से नजारा -  नत्था टॉप के रास्ते में एक जगह व्यू प्वाइंट बना हुआ है। यहां पर एक कैफेटेरिया भी है। ये दो मंजिला व्यू प्वाइंट और कैफेटेरिया अभी खुला हुआ है। यहां पकौड़े चाय के साथ कुछ और चीजें खाने पीने को मिल जाती हैं। कुछ और लोग यहां पर अपनी गाड़ियों के साथ आकर रुके हुए हैं।    

आपको बता दें नत्था टॉप के इलाके में कोई होटल नहीं है। आपको यहां पहुंचने के लिए पटनी टॉप या फिर सनासर झील के इलाके में रुकना होगा। ज्यादातर सैलानी पटनी टॉप में ही रुकते और यहीं से नत्था की ओर घूमने जाते हैं। कुछ घंटे वहां गुजारने के बाद लौट आते हैं। नत्था टॉप इलाका सेना के क्षेत्र में आता है। यहां पर एक टावर बना हुआ है। सैन्य क्षेत्र सैलानियों के लिए प्रतिबंधित है।

चाय की चुस्की - नत्था टॉप के सबसे ऊंचे प्वाइंट पर पहुंचने के बाद हमलोग रुक जाते हैं। यहां पर सड़क के किनारे एक चाय की दुकान है। वैसे तो मैं चाय नहीं पीता पर इतनी ऊंचाई पर आए हैं तो यादगारी के तौर पर चाय पीनी चाहिए। तो हमने चार चाय का आर्डर दिया और बैठ गए। कुदरत का नजारे लेने के लिए। बेनया टी स्टाल के बाहर एक लकड़ी की बेंच लगी है। इसके आसपास कुछ कुरसियां भी हैं। थोड़ी देर तक आसपास निहारते रहे। इसी दौरान चाय बनकर आ गई। 2700 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर चाय की चुस्की लेने के बाद हमलोग आगे बढ़ चले।

लकड़ियों की तस्करी - नत्था टॉप से सानासर लेक की ओर जाने वाला रास्ता एक बार फिर उतार पर है। क्योंकि सानासर इलाके की ऊंचाई नत्था टॉप की तुलना में कम है। आसपास में दूर दूर पर कुछ गांव हैं। इन गांव के लोग जंगल से लकड़ियां लेने जाते हैं। पानी की भी दिक्कत है। गांव के लोगों को काफी दूर से पानी लेकर आना पड़ता है। गांव के लोग जंगल से लकड़ियां जरूर काटते हैं। पर वन विभाग की इनपर कड़ी नजर रहती है। तस्करी रोकने के लिए वन विभाग खुद की कटवाई हुई लकड़ियों पर पहचान के लिए खास तरह का मार्क लगवाता है।

 - विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 
( PATNI TOP TO NATTHA TOP, VIEW PONT, A CUP OF TEA ) 

Friday, July 10, 2020

पटनी टॉप पार्क की सैर और बुलबुल का बच्चा


आइए साहब आपको बुलबुल का बच्चा दिखाता हूं। नन्हा सा खरगोश दिखाता हूं। इस तरह की आवाज लगाकर बुलाने वाले लोग आपको पटनी टॉप के नाग मंदिर के आसपास खूब मिल जाएंगे। आखिर के बुलबुल का बच्चा क्या है। हमारे चालक महोदय ने मना किया था कि इस तरह बुलाने वालों के चक्कर में मत पड़िएगा। दरअसल ये लोग हैंडीक्राफ्ट के दुकान वाले होते हैं। ये लोग आपको आसपास में निर्मित होने वाले कंबल, रजाई और शॉल की दुकानों में ले जाते हैं।

आमतौर पर ये एक सामान नहीं बेचते हैं। काफी चीजें दिखाने के बाद ये आपको आठ से 10 हजार के पैकेज में कई उत्पाद बेचने की बात करते हैं। वे मनी बैक गारंटी जैसी बात करते हैं। आपके पास पैसे नहीं हैं तो वे क्रेडिट डेबिट कार्ड भी स्वीकार करते हैं। या आप आर्डर करें और ये लोग सामान पार्सल से आपके घर के पते पर भेज देते हैं। चालक महोदय के मना करने के बावजूद हमलोग दो दुकानों में उनके उत्पाद देखने चले गए। हालांकि देखने के बाद कुछ खरीदा नहीं।

पटनी टॉप में क्या देखें आप पटनी टॉप में नाग मंदिर के अलावा यहां पर नए नए बने रोपवे से प्रकृति का नजारा भी कर सकते हैं। हालांकि रोपवे का सफर थोड़ा सा महंगा है। इसके अलावा कई पार्कों में सैर कर सकते हैं। इसके आगे चाहें तो नत्था टॉप और सनासर लेक और शुद्ध महादेव के मंदिर तक जा सकते हैं।

पडोरा हटमिंट्स - तो पटनी टॉप में हमारी अगली मंजिल है पडोरा हटमिंटस। ये पडोरा हटिमंट विशाल पार्क में बने ब्रिटिश कालीन आवासीय कॉटेज हैं। इनमें रहने का किराया 3500 से लेकर 10 हजार रुपये प्रतिदिन तक है। ये जम्मू कश्मीर पर्यटन के अंतर्गत आता है। इसकी ऑनलाइन और ऑन द स्पॉट बुकिंग भी संभव है। देवदार के वन और पार्क के बीच बने ये कॉटेज बड़े सुंदर लगते हैं।

यहां बने विशाल पार्क में आप घुड़सवारी का आनंद उठा सकते हैं। ये घोड़े वाले आपको एपल गार्डन, व्यू प्वाइंट, फ्लावर गार्डन, शिव घाटी, वाटर फॉल, उधमपुर जिले की सीमा और कश्मीर घाटी का नजारा कराते हैं। अभी मंदी चल रही है इसलिए तमाम घोड़े वाले हमारे पीछे पड़े हैं जो आधी दरों में ही सैर कराने को तैयार हैं।

पार्क में उनी वस्त्रों की दुकानें भी सजी हुई हैं। आप मोलभाव करके कुछ खरीद सकते हैं। हमने घुड़सवारी नहीं की तो क्या हुआ निशानेबाजी तो कर ली जाए। तो आनादि ने निशानेबाजी पर अपना जोर आजमाया। उनके कुछ निशाने सही भी लगे। यहां पर आप जीप लाइन रोपवे से क्रास वैली का मजा भी ले सकते हैं।




पडोरा हटमिंट के बाद हमलोग एक किलोमीटर आगे स्थित दूसरे पार्क ती तरफ चल पड़े हैं। यहां भी घोड़े वाले मौजूद हैं। इस पटनी टॉप पार्क के आसपास आप साइकिल किराये पर लेकर भी आसपास की सैर कर सकते हैं। यहां चौड़े टायर वाली साइकिलें भी किराये पर मिलती हैं। यहां पर सस्ती दरों पर स्थानीय सेब भी खरीदकर खा सकते हैं। खाने में भुट्टे भी मिल रहे हैं। मैं भला भुट्टे न खाउं ऐसा कैसे हो सकता है।

सीड प्रोडक्शन एरिया – पटनी टॉप के आसपास दूर दूर तक घने देवदार के पेड़ नजर आते हैं। यहां पर वन विभाग की ओर सीड प्रोडक्शन एरिया को संरक्षित किया गया है। यहां पर देवदार के बीच का उत्पादन किया जाता है। ताकि आगे भी जंगलों को संरक्षित किया जा सके।

पटनी टॉप रोपवे – पटनी टॉप में रोपवे पर सवारी का मजा लेते हुए कुदरत का नजारा कर सकते हैं। ये रोपवे पटनी टॉप से चेनानी के बीच बना हुआ है। फिलहाल यह देश के सबसे ऊंचे रोपवे होने का दावा करता है। रोपवे का एक व्यक्ति का टिकट 1200 रुपये के आसपास है। पर ऑफ सीजन में इसमें कुछ ऑफर भी रहते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmal.com
-        ( PATNI TOP PARK, PADORA HATMINTS, J&K TOURISM, HORSE RIDING )



Wednesday, July 8, 2020

पटनी टॉप का प्रसिद्ध नाग देवता का मंदिर


पटनी टॉप में नागदेवता का मंदिर स्थित है। इस मंदिर की आसपास के लोगों  काफी मान्यता है इसलिए दूर दूर से आने वाले सैलानी भी नाग मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं। यह एक लोकदेवता हैं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में कई इलाकों मे लोकदेवताओं की परंपरा रही है। हिमाचल में तो कई नाग मंदिर हैं। इसलिए पटनी टॉप का नाग मंदिर भी काफी पुराना है। बदलते समय के अनुसार मंदिर के आसपास के इलाके का सौंदर्यीकरण कर दिया गया है।

नागपूजा का परंपरा सनातन संस्कृति में हजारों साल पुराना है। तो स्थानीय लोग बताते हैं कि ये मंदिर कई हजार साल पुराना है। मुख्य सड़क से सीढ़ियां उतरते हुए आप मंदिर परिसर में पहुंच जाते हैं। छोटे से मंदिर में  नागदेवता की मूर्ति स्थापित है। श्रद्धालु मंदिर की परिक्रमा करते हैं और अपनी भूल चुक के लिए माफी मांगते हैं। कहा जाता है कि नागदेवता लोगों को कई तरह के संकट से उबारते हैं।

इस मंदिर में पूजा करने के लिए न सिर्फ हिंदू धर्म को मानने वाले बल्कि स्थानीय मुस्लिम समाज के लोग भी नाग देवता के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। स्थानीय लोगों का इस मंदिर के प्रति बहुत सम्मान है। यह मंदिर सुबह सूर्योदय से शाम को सूर्यास्त तक दर्शन के लिए खुला रहता है।


मंदिर की तस्वीर हरगिज न लें – आप नाग देवता के मंदिर मेंपहुंचे हैं तो दर्शन पूजन करें पर मंदिर की तस्वीरें हरगिज न लें। ऐसा करने के लिए स्थानीय लोग और पुजारी भी मना करते हैं। कहा जाता है कि अगर आपने तस्वीरें ले ली तो आपके घर में कलह शुरू हो जाएगा। इतना ही नहीं नाग देवता आपका पीछा करने लगते हैं। वे आपके घर में पहुंच जाते हैं। कई लोगों ने ऐसा न मानते हुए तस्वीरें ले लीं। वे लोग बाद में परेशानी में पडने पर लौटकर आते हैं। वे अपनी तस्वीरों का प्रिंट आउट लेकर आते हैं और मंदिर के पुजारी के पास जमा करते हैं। नागदेवता से क्षमा मांगते हैं और लौटकर जाते हैं।

कैसे पहुंचे - पटनी टॉप में नाग मंदिर अपर कारलाह इलाके में स्थित है। कसाल मोड से यह दूरी चार किलोमीटर के करीब है। या तो निजी वाहन से या फिर पैदल चलकर यहां तक पहुंचा जा सकता है। आम तौर पर शेयरिंग वाहन नहीं मिलते।

मंदिर के पास बाजार - नाग देवता के मंदिर के पास एक छोटा सा बाजार है। इस बाजार में खाने पीने की नास्ते की दुकाने हैं। यहां पर छोले कुलचे, कालारी आदि खा सकते हैं। मंदिर के पास ही एक बच्चों का स्कूल भी है। जब हमलोग पहुंचे हैं तब स्कूल खुला हुआ है और स्कूल में बच्चे अपनी पढ़ाई में लगे हुए हैं। यह सरकारी मिड्ल स्कूल है, जो यहां 1991 से संचालित है। स्कूल का भवन अच्छा बना हुआ है।

मंदिर के पास छोटा सा स्कूल - नाग मंदिर के आसपास भी कुछ होटल बने हुए हैं। यहां पर रहने का फायदा है कि आपको आसपास में एक छोटा सा बाजार मिलता है। पर पटनी टॉप में मुझे को बैंक एटीएम दिखाई नहीं दिया। आप यहां पर पहुंचे तो अपने लिए पर्याप्त नकदी निकालकर ही आएं तो अच्छा रहेगा।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य -  vidyutp@gmail.com 
( PATNI TOP, NAG DEVTA MANDIR ) 


Monday, July 6, 2020

पटनी टॉप – अदभुत हिल स्टेशन और बेहतरीन नजारे


पटनी टॉप अपने देश के जम्मू कश्मीर प्रांत में उधमपुर जिले में स्थित एक अति सुंदर हिल स्टेशन है। खास तौर पर सर्दियों में यह सैलानियों से गुलजार रहता है। वैसे तो यहां आप सालों भर पहुंच सकते हैं। हम यहां अक्तूबर के अंत में पहुंचे हैं। आजकल यहां अच्छी ठंड है। पर यहां दिसंबर, जनवरी और फरवरी में अच्छी खासी बर्फबारी होती है।

पटनी टॉप समुद्र तल से 2024 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चिनाब नदी इसके करीब से होकर बहती है। पटनी टॉप में सैलानियों के लिए दर्जनों होटल बने हुए हैं। यहां पर छोटा सा बाजार नाग टेंपल के आसपास के इलाके में है। बाकी सारा इलाका होटल और रिजार्ट से भरा हुआ है। पर कहीं भी भीड़भाड़ नहीं दिखाई देती है। 

पटनी टॉप में हमारा होटल न्यू ब्रॉडवे  - पटनी टॉप में होटल का चयन हमने ऑनलाइन गोआईबीबो डॉट काम से किया था। पर हमारा ये चयन बेहतरीन रहा। इस होटल का नाम है – होटल न्यू ब्राडवे। यह पटनी टॉप में कसल मोड़ के पास है। लोकल बसों से भी यहां तक पहुंचा जा सकता है। बस मोड़ से थोड़ा सा पैदल चलना पड़ेगा।
होटल डोगरा रेसिडेंसी के बगल से एक कच्चा रास्ता अंदर की ओर जा रहा है। इस रास्ते में थोड़ा चलने पर ब्राडवे आखिरी होटल है। पर उसके आसपास पांच सात छोटे बड़े होटल हैं। होटल के बगल से पटनी टॉप रोपवे की लाइन गुजरती है।

हमें चार मंजिले होटल में सबसे ऊपरी मंजिल पर कमरा मिला है। ये कमरा चार बेड रूम वाला विशाल आकार का है। दोनों तरफ डबल बेड लगे हैं,  बीच में सोफा और डायनिंग टेबल। कमरे तीन तरफ से बालकोनी है। तीनों तरफ खिड़कियां है। दिन हो या फिर रात परदे हटाकर आप प्रकृति का नजारा करते रह सकते हैं। ये कमरा हमें बेइन्तहा पसंद आ गया। होटल की खिड़की से नीचे दूर तक गहराई दिखाई दे रही है। एक तरफ चीड़ के सघन वन दृष्टि में हैं। ऐसा लगता है हम किसी सपनों की दुनिया में पहुंच गए हैं, जहां पहुंचने के बारे में हम बार बार सोचा करते थे।

होटल की सबसे नीचे वाली मंजिल पर किचेन और डायनिंग हॉल है। यहां रहने के बाद कहीं और खाने जाने के बारे में आप नहीं सोच सकते। हमने होटल के केयर टेकर को रात के खाने का आर्डर कर दिया है। दो शाकाहारी थाली। एक थाली 150 रुपये की है। इसमें चार चपाती, दो सब्जियां और दाल के अलावा चावल भी है।

होटल के रसोइये ने बताया कि वह होटल में रोज रहने वाले लोगों के हिसाब से दिन में ही जाकर हरी सब्जियां आदि लेकर आ जाता है। इसके लिए उसे चार किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है। संयोग से आज इस विशाल होटल में हमारे वाला कोई और मेहमान नहीं है। हां, खाना उन्होंने सुस्वादु बनाया है। वे रूम सर्विस देने को तैयार थे पर हमने डायनिंग हॉल में जाकर गर्मागर्म खाना पसंद किया। 
और सुबह सुबह जंगल की सैर के लिए चल पड़े...

सुबह हुई तो हमने अपने कमरे के तीनों तरफ के परदे हटा दिए। मीठी धूप सीधे हमारे कमरे में प्रवेश कर रही थी। पर मैं तो निकल पड़ा सैर करने। कहां, जंगलों की ओर। होटल से आगे कोई इमारत नहीं है। जंगल शुरू हो जाता है। आधा किलोमीटर जंगल में जाने के बाद वापस लौट आया। तब तक नास्ता तैयार हो चुका था। नास्ते में आलू पराठे। हम सबने दो-दो पराठे खा लिए। इसके बाद तो दिन भर घूमना है। इस बीच हमारे चालक महोदय बिट्टू शर्मा से बात हो गई है। वे नौ बजे हमें लेने के लिए होटल पहुंच जाएंगे।

शुद्ध शाकाहारी होटल - एक बात और होटल न्यू ब्रॉडवे पटनी टॉप का शुद्ध शाकाहारी होटल है। होटल का लॉन हरा भरा सुंदर है, जो आर्किड और लाल गुलाब के फूलों से सजा हुआ है। ब्रॉडवे  होटल के बगल में मिस्टी पाइन कॉटेज, हिमालया व्यू, डोगरा रेसिडेंसी, सवेरा रिजार्ट, ग्रीन कॉटेज, देवदार कॉटेज, वरदान रिजार्ट होटल सेमसन जैसे होटल स्थित हैं।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य  vidyutp@gmail.com
-        ( HOTEL NEW BROADWAY, PATNI TOP, KASHMIR, VEG FOOD )

Saturday, July 4, 2020

प्रेम दी हट्टी – मिठास ऐसी जो नहीं भूलती

जम्मू से श्रीनगर हाईवे पर बीच में एक कस्बा आता है कूद। पर चेनानी नाशरी सुरंग बन जाने के बाद ये कूद कस्बा रास्ते में नहीं पड़ता। क्योंकि पहाड़ों के नीचे से सुरंग गुजर रही है। तो नए रास्ते में कई शहर कस्बे अब नहीं पड़ते। पहले जम्मू से श्रीनगर जाने के मार्ग में पटनी टॉप आता था। पर नए रास्ते में वह भी नहीं आता।


जम्मू श्रीनगर हाईवे पर हमें प्रेम दी हट्टी कूद वाले की दुकान का बोर्ड कई जगह नजर आता है। दरअसल कूद में प्रेम दी हट्टी मिठाइयों की प्रसिद्ध दुकान है। जम्मू श्रीनगर के बीच चलने वाले वाहन यहां रूक कर मिठाइयां खाना और खरीदना नहीं भूलते थे। पर नए रास्ते के कारण अब कूद की उस पुरानी दुकान तक पहुंचना मुश्किल हो गया है तो प्रेम दी हट्टी ने अपनी ब्रांच ऊधमपुर के आसपास नए हाईवे पर खोल दी है। बोर्ड पर लिखा है- प्रेम दी हट्टी, कूद वाले। 

यह मिठाइयों की तकरीबन सौ साल पुरानी दुकान है। इसलिए कई पीढ़ियों के लोगों में इसकी लोकप्रियता है। चेनानी से पटनी टॉप के लिए चलते हुए कूद के बाजार में पहुंचने के बाद हमलोग प्रेम दी हट्टी के सामने रुक गए। यहां पर उनकी कई तरह की मिठाइयों का स्वाद लिया। कुछ लोग तो कई कई किलो के पैकेट पैक कराने में जुटे थे। पर हमने भी आधे किलो मिठाई पैक करा ली। ताकि कल परसों खा सकें। 


वैसे प्रेम दी हट्टी अपनी मिठाई पतीसा, पेड़ा, बर्फी, कलाकंद और चॉकलेट बर्फी के लिए जाने जाते हैं। वैसे उनकी बाकी मिठाइयां भी खाने में अच्छी हैं। वे शुद्ध देसी घी में मिठाइयां बनाने का दावा करते हैं। आप भी उधर से गुजरें तो उनकी मिठाइयों का स्वाद ले सकते हैं। उधमपुर में उनकी दुकान हाउसिंग कॉलनी में नेशनल हाईवे के किनारे ही स्थित है। कूद में प्रेम दी हट्टी की इतनी लोकप्रियता है कि उसके आसपास कई और दुकानें खुल गई हैं। पर भीड़ सबसे ज्यादा प्रेम दी हट्टी के पास ही होती है। 

रास्ते में अनार का स्वाद – पटनी टॉप जाने के मार्ग में जगह जगह सड़क के किनारे अनार के पेड़ नजर आ रहे हैं। इन पेड़ो में अनार पक चुके हैं। एक जगह रुक कर हमने कुछ अनार तोड़े और उन्हें खाया भी। अपने वाहन से चलने का यही तो मजा है कि कहीं भी रुक जाओ। रास्ते में एक जगह से हमने चीड़ के पेड़ से निकलने वाले सूखे फल भी जुटाए। ड्राईंग रूम में सजाने के लिए।

चेनानी से आगे चलने के बाद रास्ता चढ़ाई वाला आ गया है। गाड़ी घुमावदार रास्ते से चल रही है। पर  चालक महोदय बड़ी संयत से 15-20 की गति से गाड़ी चला रहे हैं ताकि हमलोगों को तीखे मोड़ पर ज्यादा परेशानी नहीं हो। वैसे तो चेनानी से पटनी टॉप की दूरी ज्यादा नहीं है पर घुमावदार रास्तों के कारण यह दूरी बढ़ जाती है। इन रास्तों पर सावधानी से वाहन नहीं चलाने पर हादसों का भी अंदेशा रहता है। कई जगह रास्ते में ऐसे स्मारक बने हुए भी नजर आए जहां  लोग सड़क हादसे में असमय मौत का शिकार हुए थे।

और पहुंच गए हम पटनी टॉप – शाम ढलने से पहले हौले हौले वाहन चलाते हुए हमलोग पटनी टॉप की सीमा में प्रवेश कर गए हैं। हमारे चालक महोदय बिट्टू शर्मा के बेटे का भी एक होटल है रास्ते में। वे लीज पर एक होटल लेकर उसका प्रबंधन देखते हैं। बेटे से मिलने के बाद वे आगे हमारे होटल की तरफ चल पड़े। तो बने रहिए हमारे साथ आगे हम करेंगे पटनी टॉप और आसपास की और भी ढेर सारी बातें।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        ( PREM DI HATTI, SWEETS, KUD WALE, PATNI TOP, UDHAMPUR )






Thursday, July 2, 2020

देश की सबसे लंबी चेनानी नाशरी सुरंग और फिल्म जानी दुश्मन


थोड़ी सी पेट पूजा के बाद हमलोग आगे चल पड़े हैं। हम चेनानी पहुंच गए हैं। जम्मू श्रीनगर हाईवे पर यहां सुंरग का निर्माण किया गया है। यह सुरंग तकरीबन साढ़े नौ किलोमीटर लंबी है।

प्रधानमंत्री ने 2 अप्रैल 2017 को चेनानी नाशरी सुरंग का उदघाटन किया जिसकी कुल लंबाई 9.28 किलोमीटर है। इसका आधिकारिक नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी टनेल दिया गया है। यह एनएच 44 पर बनी दो लेन वाली सुरंग है। इसका निर्माण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में 2011 में शुरू हुआ था। इस नौ किलोमीटर से कुछ ज्यादा लंबी सुरंग ने जम्मू श्रीनगर के बीच की दूरी 30 किलोमीटर से ज्यादा कम कर दी है।

दो घंटे यात्रा का समय कम हुआ - इससे जम्मू श्रीनगर की यात्रा में लगने वाले समय में दो घंटे की कटौती हुई है। सबसे बड़ा लाभ है कि बर्फबारी के दौरान जब पत्नी टॉप के आसपास के इलाकों में जम्मू श्रीनगर हाईवे को बंद करना पड़ता था, अब उसकी जरूरत नहीं पड़ती। बर्फबारी या हिम स्खलन के समय वाहनों की लंबी लबीं कतारें लग जाती थीं। कई बार यात्रा दो दो दिन रोकनी पड़ती थी।

तकरीबन 1200 मीटर की ऊंचाई पर बनी चेनानी नाशरी सुरंग फिलहाल देश की सबसे लंबी सड़क मार्ग वाली सुरंग है। इसके निर्माण में 3720 करोड़ रुपये का खर्च आया था। सुरंग का व्यास 13 मीटर का है। इसके निर्माण में एकीकृत सुरंग प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। किसी भी तरह के खतरे से मुकाबले के लिए भी पूरे इंतजाम किए गए हैं। पर इस सुरंग के बन जाने से कूद, पटनी टॉप और बटोत जैसे कस्बे ऊपर रह गए हैं।  

हमारे चालक महोदय बता रह हैं कि यह सुरंग भी एक टूरिस्ट प्वाइंट बन गई है। काफी सैलानी टैक्सी से इस सुरंग को पार करने के लिए भी अतिरिक्त शुल्क अदा करते हैं। सुरंग से होकर जाने के लिए अलग से टोल टैक्स अदा करना पड़ता है। अगर आपको कूद और पटनी टॉप की ओर जाना है तो सुरंग से पहले से ही रास्ता अलग हो जाता है।

चेनानी से आगे श्रीनगर की तरफ जाने पर आपको बनिहाल में जवाहर सुरंग मिलती है। यह 2.85 किलोमीटर लंबी सुरंग है जिसका निर्माण 1956 में हुआ था। यह देश की आजादी के बाद बनी सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण सुरंग थी।

जानी दुश्मन की शूटिंग हुई थी यहां - चेनानी का संबंध सन 1979 में मल्टी स्टार कास्ट वाली फिल्म जानी दुश्मन से भी है। हमारे चालक बिट्टू शर्मा जी बताते हैं कि पूरी फिल्म की शूटिंग चेनानी गांव में ही हुई थी। सुमधुर गीतों से सजी ये फिल्म सुपर हिट रही थी। इसमें संजीव कुमार, विनोद मेहरा, जीतेंद्र, सुनील दत्त, शत्रुघ्न सिन्हा, रेखा, रीना राय जैसे तमाम बड़े सितारे थे।

इस फिल्म का गाना – चलो रे डोली उठाओ कहार, पिया मिलन की रूत आई....काफी हिट रहा है। आज भी यह शादी समारोह में बजता है। एक रुमानी गीत – देखा न सैंया हमार जैसा... भी खूब लोकप्रिय हुआ था। इस फिल्म की शूटिंग के लिए पूरी स्टार कास्ट जिसमें करीब 500 लोग शामिल थे, ने कई महीने तक चेनानी गांव में डेरा डाला था। फिल्म का निर्माण राज कुमार कोहली ने किया था।

पर उससे आगे की भी एक बात है कि इस फिल्म की कहानी एक लोककथा पर आधारित है। वह लोककथा जम्मू क्षेत्र के स्थानीय राजा की है। कहा जाता है कि वह राजा अपने प्रजा की हर नवविवाहिता को पहली रात अपने पास बुलाता था। उस अत्याचारी राजा की कहानी से फिल्म जानी दुश्मन की कथा की थीम प्रभावित थी।

पर जानी दुश्मन एक भुतहा फिल्म थी। बच्चों को देखना बिल्कुल मना था। सन 1979 में तीसरी कक्षा में था। बड़े होने पर मैंने ये फिल्म देखी थी। आप भी इस फिल्म को देखें आपको उधमपुर जिले के चेनानी गांव के आसपास के नजारे दिखाई देंगे। अब चेनानी उधमपुर जिले की तहसील बन गई है। अपने रीलीज के समय यह फिल्म जम्मू क्षेत्र में सुपर डुपर हिट रही थी।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        (CHENANI NASARI TUNNEL, JANI DUSHMAN MOVIE )
  


Tuesday, June 30, 2020

मनमोहक, मनभावन तवी नदी के संग-संग


हमलोग कटरा से उधमपुर की राह पर हैं। कटरा से बाहर कोई दस किलोमीटर जाने पर हमें ककड़ियाल में श्रीमाता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी का परिसर नजर आया। ये विश्वविद्यालय श्रीमाता वैष्णो देवी ट्रस्ट ने बनवाया है। यहां कई विधाओं में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। कुछ ही सालों में विश्विवद्यालय ने अच्छी रैंकिंग हासिल की है।  

कटरा शहर से कुछ किलोमीटर आगे निकलने पर सड़क के किनारे दाहिनी तरफ शनि देव का विशाल मंदिर आया। स्थानीय लोगों की इस मंदिर में बड़ी आस्था है। वैसे शनि के कोप से हर कोई डरता है। शनि गरीबों, दलितों और पीड़ितों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। हमने यहां पर रुक कर उन्हें प्रणाम किया और आगे की ओर बढ़ चले।

थोड़ी देर बाद टिकरी आया। टिकरी वह जगह हैं जहां पर हमें जम्मू श्रीनगर हाईवे मिला। हमलोग बायीं तरफ यानी उधमपुर की तरफ चलने लगे। अगर दाहिनी तरफ जाएंगे तो जम्मू पहुंच जाएंगे। मतलब जम्मू से कटरा अगर सड़क मार्ग से आना हो तो उधमपुर नहीं आएगा। पर रेल मार्ग उधमपुर होकर आती है। यहां से श्रीनगर की दूरी 220 किलोमीटर लिखी है। आगे बालियां नामक ग्राम आया। थोड़ी देर बाद हमलोग उधमपुर शहर पहुंच गए हैं। हाईवे ऊधमपुर शहर के बाहरी इलाके से होकर गुजर जाता है। हमने अब उधमपुर शहर को पार कर लिया है। 

उधमपुर का रेलवे स्टेशन उधमपुर शहर से बाहर बना हुआ है। रेलवे स्टेशन और शहर के बीच में श्रीनगर की ओर जाने वाला नेशनल हाईवे नंबर 44 गुजर रहा है। इसके बायीं तरफ शहर है तो दाहिनी तरफ रेलवे स्टेशन अगर आप रेल से देर रात या अहले सुबह उधमपुर रेलवे स्टेशन उतरते हैं तो कहीं जाने के लिए साधन मिलने में अभी थोड़ी दिक्कत हो सकती है। 

माधवी के आग्रह पर हमारे ड्राईवर साहब बिट्टू शर्मा जी गाड़ी बहुत ही धीमी गति से संयत से चला रहे हैं। जम्मू श्रीनगर हाईवे को चौड़ा करने का काम जगह जगह जारी है। इसलिए कई जगह सड़क पर काम चलता हुआ नजर आ रहा है। तो कई जगह धूल उड़ रही है तो वाहन सावधानी से चलाना और जरूरी हो जाता है।

सूर्य की पुत्री है तवी -  उधमपुर के आगे चलने पर हमें हाईवे के साथ साथ तवी नदी बहती हुई दिखाई दे रही है। एक जगह मैं बिट्टू शर्मा जी से आग्रह करता हूं टैक्सी रोकने के लिए। तवी को काफी निकट से देखने की इच्छा है। मैं उतर कर चला जाता हूं तवी नदी की जलधारा के काफी करीब। चांदी जैसा धवल जल है तवी का। बीच में ढेर सारे पत्थर हैं। इन शिलाओं के संग सतत प्रणय संवाद करती हुई तवी मदमाती हुई आगे बढ़ती जाती है। इन शिलाओं ने भी क्या किस्मत पाई है। मैं देख रहा हूं कि थकी होने के बावजूद पीछे पीछे माधवी भी चली आ रही हैं। तवी का प्यार उन्हें भी बुला लेता है। तवी नदी जम्मू क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाती है। यह चिनाब की सहायक नदी है। 

तवी का उदगम डोडा जिले में भद्रवाह के पास कैलाश कुंड के आसपास से हुआ है। तवी नदी के उदगम से पहले शुद्ध महादेव का मंदिर है, जो इस इलाके का प्रमुख तीर्थ है। तवी नदी को सूर्य की पुत्री माना जाता है। इसकी कुल लंबाई मात्र141 किलोमीटर है। जम्मू शहर भी तवी नदी के तट पर बसा हुआ है। आगे पाकिस्तान में जाकर तवी चिनाब में समाहित होकर अपना अस्तित्व मिटा देती है। नदियों की यही नियती है। ईश्क में फना हो जाना। 

रास्ते में कई छोटे छोटे झरने तवी नदी में समाहित होते रहते हैं। थोड़ी दूर आगे चलने पर हमलोग शाम के नास्ते के लिए एक होटल में रुके। इस होटल का नाम भी है तवी व्यू। यह समरोली नामक एक छोटे से गांव में है। हमारे टैक्सी वाले को सामान का एक पैकेट यहां पर किसी दुकानदार को देना था। पर वह दुकान आज बंद है तो उन्होंने पड़ोस के दुकान को ये पैकेट पकड़ा दिया है।

होटल के पृष्ठ भाग से तवी नदी का सुंदर नजारा दिखाई दे रहा है। तवी नदी हाईवे के साथ ही चल रही है। नदी की गहराई ज्यादा नहीं है। आप कहीं भी नदी के अंदर उतर सकते हैं। अनादि को ये जगह काफी पसंद आई और वे नदी के उस पार के नजारों की तस्वीरें उतारने में व्यस्त हो गए। तवी नदी का नजारा करते हुए हमलोग पराठे के संग चाय की चुस्की ले रहे हैं।  हमारा सफर अभी जारी है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com

 ( TAWI RIVER, KATRA TO UDHAMPUR, SAMROLI, HOTEL TAWI VIEW )
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